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Tuesday, 17 March 2015

माँ लक्ष्मी की स्थायी कृपा, धन प्राप्ति के लिए कुछ खास उपाय

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माँ लक्ष्मी की स्थायी कृपा, धन प्राप्ति  के लिए कुछ खास उपाय

 

 1. सदैव याद रखें कभी भी किसी से कोई चीज मुफ्त में न लें , हमेशा उसका मूल्य अवश्य ही चुकाएं , कभी भी किसी व्यक्ति को धोखा देकर धन का संचय न करें , इस तरह से कमाया हुआ धन टिकता नहीं है , वह उस व्यक्ति और उसके परिवार के ऊपर कर्ज के रूप में चढ जाता है और ऐसा करने से व्यक्ति के स्वयं के भाग्य और उसके कर्म से आसानी से मिलने वाली सम्रद्धि और सफलता में भी हमेशा बाधाएँ ही आती है ।
2. हर एक व्यक्ति को चाहे वह अमीर हो या गरीब , उसका जो भी व्यवसाय / नौकरी हो अपनी आय का कुछ भाग प्रति माह धार्मिक कार्यों में अथवा दान पुण्य में अवश्य ही खर्च करें , ऐसा करने से उस व्यक्ति पर माँ लक्ष्मी की सदैव कृपा बनी रहती है , उसके परिवार में हर्ष - उल्लास और सहयोग का वातावरण बना रहता है तथा सामान्यता वह अपने दायित्वों के पूर्ति के लिए पर्याप्त धन अवश्य ही आसानी से कमा लेता है ।

3. स्त्रियों को स्वयं लक्ष्मी का स्वरुप माना गया है । प्रत्येक स्त्री को पूर्ण सम्मान दें । घर की व्यवस्था अपनी पत्नी को सौपें , वही घर को चलाये उसके काम में कभी भी मीन मेख न निकालें । अपने माता पिता को अपनी आय का एक निश्चित हिस्सा अवश्य ही दें । घर में कोई भी बड़ा काम हो तो उस घर के बड़े बुजुर्गों विशेषकर स्त्रियों को अवश्य ही आगे करें । अपने घर एवं रिश्तेदारी में अपनी पत्नी को अवश्य ही आगे रखें । अपनी माँ, पत्नी, बहन एवं बेटी को हर त्यौहार , जन्मदिवस , एवं शादी की सालगिरह आदि पर कोई न कोई उपहार अवश्य ही दे ।

4. घर के मुखिया जो अपने घर व्यापार में माँ लक्ष्मी की कृपा चाहते है वह रात के समय कभी भी चावल, सत्तू , दही , दूध ,मूली आदि खाने की सफेद चीजों का सेवन न करें इस नियम का जीवन भर यथासंभव पालन करने से आर्थिक पक्ष हमेशा ही मजबूत बना रहता है ।

5. शुक्रवार को सवा सौ ग्राम साबुत बासमती चावल और सवा सौ ग्राम ही मिश्री को एक सफेद रुमाल में बांध कर माँ लक्ष्मी से अपनी गलतियों की क्षमा मांगते हुए उनसे अपने घर में स्थायी रूप से रहने की प्रार्थना करते हुए उसे नदी की बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें , धीरे धीरे आर्थिक पक्ष मजबूत होता जायेगा ।

धन-समृद्धि प्राप्त करने के कुछ सरल और चमत्कारिक उपाय दिये जा रहे हैं, जिसे अपनाकर व्यक्ति दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदल सकता है। - अपने घर के ईशान कोण में श्री यंत्र ताम्रपत्र, रजत यंत्र या भोजपत्र पर बनायें। प्राण प्रतिष्ठा करके नित्य पूजा करने से विविध ऐश्वर्य के साथ लक्ष्मी प्राप्त होती है। - अर्क (अकोड़ा), छाक (छिला), खैर, अपामार्ग, पीपल की जड़, गूलर की जड़ खेजड़े की जड़, दुर्वा एवं कुशा की जड़ को एक चांदी की डिब्बी में रखकर नित्य पूजा करें। जीवन में कभी असफलता नहीं आयेगी, नवग्रह शांत रहेंगे सुख सम्प की बढ़ोरी होगी। - सम्पूर्ण दीपावली की रात्रि ‘‘हत्था जोड़ी’’ को सामने रखकर ‘‘धनम् देहि’’ मंत्र का जाप करें निश्चित रूप से धन की प्राप्ति होगी। - यदि दीपावली रविवार को हो तो ब को लाल रंग से रंग दें। यदि सोमवार को हो तो ब पर सफेद अबीर लगा दें। मंगल को हो तो लाल, बुधवार को हो तो हरा, बृहस्पतिवार को हो तो पीला रंग, शुक्रवार को हो तो सफेद अबीर, शनिवार को हो तो ब में काला अबीर लगायें। धन की वृद्धि होगी। - लक्ष्मी आकर्षण यंत्र या छसा यंत्र दीवाली की रात्रि को सफेद कोरे कागज पर लाल स्याही से या अष्टगंध से लिखकर 100 छोटी-छोटी गोलियां बना लें। उन गोलियों को सवा किलो आटे में घी, शक्कर (चीनी) का बूरा दूध मिला दें। गीले आटे में गोली डालकर छोटी-छोटी आटे की गोलियां बना लें। विभिन्न मंत्र बोलते हुए मछलियों को खिलाएं। धन सम्प की वर्ष भर कमी नहीं रहेगी। ‘‘ऊँ महाशक्ति वेगेन, आकर्षय आकर्षय मणिभद्र स्वाहा।’’ - दीवाली पूजन के समय कौड़ियों को केसर या हल्दी से रंगकर पीले कपड़े में बांध लें और फिर इन कौड़ियों को धन रखने के स्थान पर रखें, धन की कमी नहीं रहेगी। - पांच गोमती चक्र दीपावली के दिन पूजा के समय थाली में रखें और निम्न मंत्र का उच्चारण 108 बार (एक माला) करें। ‘‘ऊँ वे आरोग्यानिकरी रोग नशेषा नमः’’ इसको धन के स्थान पर रखने से धन की कमी नहीं रहेगी। सब रोगों का नाश होगा। शरीर स्वस्थ रहेगा। - गोमती चक्र उपरोक्त मंत्र से या ऊँ लक्ष्मी नमः’’ से अभिमंत्रित करके लाल पोटली में बांध लें और दुकान में किसी स्थान पर रख दें। जब तक पोटली दुकान में रहेगी तो निश्चय ही व्यापार में उन्नति होगी या व्यापार रुक गया तो फिर तेजी से शुरु हो जायेगा। - दीपावली के दिन प्रातःकाल उठकर तुलसी के की माला बनाकर श्री महालक्ष्मी के चरणों में अर्पित करें। धन लाभ होगा। - दीपावली की प्रातःकाल सबसे पहले साबुत काले उड़द और चमकीला काला वस्त्र किसी को दान करें या शनि मंदिर में चुप-चाप रख दें, ग्रह दोष समाप्त हो जायेगा। - दीपावली के दिन काली मिर्च के दाने ‘ऊँ क्लीं’ बीज मंत्र का जप करते हुए परिवार के सदस्यों के सिर पर घुमाकर दक्षिण दिशा में घर से बाहर फेंक दें, शत्रु शांत हो जायेंगे। - दीपावली की रात को 11 हल्दी की गांठ लें, इनको पीले कपड़े में बांध लें फिर लक्ष्मी-गणेश की संयुक्त फोटो के सामने घी का दीपक जलायें और 11 माला निम्न मंत्र का उच्चारण करें। ‘‘ऊँ वक्र- तुण्डाय हं।’’ फिर हल्दी की गांठों वाली पोटली अपने हाथ में लेकर ‘श्रीं श्रीं’ का जाप करते हुए कैश बाक्स में रखें और प्रतिदिन धूप दें। लक्ष्मी स्थिर रहेगी। - दीपावली के दिन 11 ‘‘कौड़ियां,’’11 गोमती चक्र, 5 सुपारी एवं 5 काली हल्दी की गांठें लें। अब काली हल्दी की गांठ पर पीली पिसी हुई हल्दी की छींटे लगाते समय श्रीं श्रीं का उच्चारण करते रहें। दीपावली की सारी रात उस सामग्री को पड़े रहने दें, अगले दिन इन सारी वस्तुओं को पीले कपड़े मं बांधकर तिजोरी में रख दें, लक्ष्मी वर्ष भर प्रसन्न रहेंगी। - घर में कमलगट्टे की माला, लघु नारियल, दक्षिणावर्ती शंख, श्वेतार्क गणपति, श्री यंत्र, कुबेर यंत्र आदि स्थापित कर जो भी दीपावली की रात को नित्य इनकी पूजा करता है ‘उनके घर में लक्ष्मी पीढ़ियों तक वास करती हैं।’ - दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी जी की फोटो के सामने शुद्ध देशी घी के दीपक जलाकर कमलगट्टे की माला से इस मंत्र का उच्चारण करें ‘ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं दारिरय विनाशके जगत्मासूत्यै नमः’। इस मंत्र से लक्ष्मी देवी प्रसन्न होती हैं। यही क्रिया यदि रोज करें तो लक्ष्मी का वास स्थिर हो जायेगा। - दीपावली के दिन शनि की साढ़ेसाती, ढैया या अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए काले तिल और कपास की ब से सरसों के तेल का दीपक जलाएं और शमी के पौधे के सामने शनि मंत्र का उच्चारण करें। शनि का बुरा प्रभाव कम हो जायेगा, शुभ फल देगा। - शंख में, गोबर में, आंवले में और सफेद वस्तुओं में लक्ष्मी का वास होता है। इनका प्रयोग सदा करें। सदा आंवला घर में रखें। लक्ष्मी का वास सदा रहेगा। - दीपावली पूजन के बाद पूरे घर में गुग्गुल का धुआं दें। बुरी आत्माओं और आसुरी शक्तियों से रक्षा रहेगी। - यदि बिल्ली के जेर मिल जायें तो दीपावली की रात्रि को या किसी शुभ मुहूर्त में उस पर हल्दी लगाएं और बायें हाथ की मुठ्ठी में रखकर आखें बंद करके ‘‘मर्जबान उल किस्ता’’ यह मंत्र 54 बार पढ़ें और दूसरे दिन उसे धन रखने के स्थान पर रखें। - दीपावली की शाम को अशोक वृक्ष की जड़ अशोक वृक्ष से मांगकर लायें तथा अपने पास रखें, धन स्थिर रहेगा। - दीपावली को प्रातः काल महालक्ष्मी के चित्र के समक्ष घी का दीपक, 2 लौंग डालकर जलाएं। नैवेद्य में खीर या हलवा रखें। तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें और ‘‘ऊँ नमो महालक्ष्म्यै नमः’’ मंत्र का जाप करें। लक्ष्मी प्रसन्न रहेगी और घर में वास रहेगा।  

 

Thursday, 12 March 2015

शीतला षष्ठी व्रत पर्व कथा

By Unknown   Posted at  00:08   No comments
                 शीतला षष्ठी व्रत पर्व कथा








शीतला षष्ठी व्रत पर्व कथाशीतला माता महात्मय
माघ शुक्ल षष्ठी तिथि का व्रत शीतला माता के नाम से किया जाता है। इस व्रत का पालन आमतर पर महिलाएं करती हैं। शीतला माता के व्रत का महात्मय है कि जो भी व्रत रखकर इनकी पूजा करता है वह दैहिक और दैविक ताप से मुक्त हो जाता है। यह व्रत पुत्र प्रदान करने वाला एवं सभाग्य देने वाला है। पुत्री की इच्छा रखने वाली महिलाओं के लिए यह व्रत उत्तम कहा गया है।

शीतला माता व्रत कथा

कथा के अनुसार एक साहूकार था जिसके सात पुत्र थे। साहूकार ने समय के अनुसार सातों पुत्रों की शादी कर दी परंतु कई वर्ष बीत जाने के बाद भी सातो पुत्रों में से किसी के घर संतान का जन्म नहीं हुआ। पुत्र वधूओं की सूनी गोद को देखकर साहूकार की पत्नी बहुत दु:खी रहती थी। एक दिन एक वृद्ध स्त्री साहूकार के घर से गुजर रही थी और साहूकार की पत्नी को दु:खी देखकर उसने दु:ख का कारण पूछा। साहूकार की पत्नी ने उस वृद्ध स्त्री को अपने मन की बात बताई। इस पर उस वृद्ध स्त्री ने कहा कि आप अपने सातों पुत्र वधूओं के साथ मिलकर शीतला माता का व्रत और पूजन कीजिए, इससे माता शीतला प्रसन्न हो जाएंगी और आपकी सातों पुत्र वधूओं की गोद हरी हो जाएगी।

साहूकार की पत्नी तब माघ मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को अपनी सातों बहूओं के साथ मिलकर उस वृद्धा के बताये विधान के अनुसार माता शीतला का व्रत किया। माता शीतला की कृपा से सातों बहूएं गर्भवती हुई और समय आने पर सभी के सुन्दर पुत्र हुए। समय का चक्र चलता रहा और माघ शुक्ल षष्ठी तिथि आई लेकिन किसी को माता शीतला के व्रत का ध्यान नहीं आया। इस दिन सास और बहूओं ने गर्म पानी से स्नान किया और गरमा गरम भोजन किया। माता शीतला इससे कुपित हो गईं और साहूकार की पत्नी के स्वप्न में आकर बोलीं कि तुमने मेरे व्रत का पालन नहीं किया है इसलिए तुम्हारे पति का स्वर्गवास हो गया है। स्वप्न देखकर साहूकार की पत्नी पागल हो गयी और भटकते भटकते घने वन में चली गईं।

वन में साहूकार की पत्नी ने देखा कि जिस वृद्धा ने उसे शीतला माता का व्रत करने के लिए कहा था वह अग्नि में जल रही है। उसे देखकर साहूकार की पत्नी चंक पड़ी और उसे एहसास हो गया कि यह शीतला माता है। अपनी भूल के लिए वह माता से विनती करने लगी, माता ने तब उसे कहा कि तुम मेरे शरीर पर दही का लेपन करो इससे तुम्हारे Šৠपर जो दैविक ताप है वह समाप्त हो जाएगा। साहूकार की पत्नी ने तब शीतला माता के शरीर पर दही का लेपन किया इससे उसका पागलपन ठीक हो गया व साहूकार के प्राण भी लट आये।

शीतला माता व्रत विधि

कथा में माता शीतला के व्रत की विधि का जैसा उल्लेख आया है उसके अनुसार अनुसार शीतला षष्ठी के दिन स्नान ध्यान करके शीतला माता की पूजा करनी चाहिए (Sheetla Shasti)। इस दिन कोई भी गरम चीज़ सेवन नहीं करना चाहिए। शीतला माता के व्रत के दिन ठंढ़े पानी से स्नान करना चाहिए। ठंढ़ा ठंढ़ा भोजन करना चाहिए। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे बसयरा (Basyorra) भी कहते हैं। इसे बसयरा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन लोग रात में बना बासी खाना पूरे दिन खाते हैं। शीतला षष्ठी के दिन लोग चुल्हा नहीं जलाते हैं बल्कि चुल्हे की पूजा करते हैं। इस दिन भगवान को भी रात में बना बासी खाना प्रसाद रूप में अर्पण किया जाता है। इस तिथि को घर के दरबाजे, खिड़कियों एवं चुल्हे को दही, चावल और बेसन से बनी हुई बड़ी मिलाकर भेंट किया जाता है।

इस तिथि को व्रत करने से जहां तन मन शीतल रहता है वहीं चेचक से आप मुक्त रहते हैं। शीतला षष्ठी (Sheetla Sasti) के दिन देश के कई भागो में मिट्टी पानी का खेल उसी प्रकार खेला जाता है जैसे होली में रंगों से।






Tuesday, 10 March 2015

व्यापार/नौकरी /रोजगार एवं कार्य क्षेत्र में सफलता के कुछ अचूक उपाय /

By Unknown   Posted at  22:30   No comments
व्यापार/नौकरी /रोजगार एवं कार्य क्षेत्र में सफलता के कुछ अचूक उपाय /










नोट --  इन सिद्ध यंत्रों की स्थापना सभी प्राणियों के कल्याण हेतु की गयी है , यदि आपके मन में कोई संदेह है , या आप इन यंत्रों में विश्वास नहीं रखते है तो आप इस पेज को बंद कर दें , परन्तु इन यंत्रों का उपहास एवं अनादर न करें ।


१ सोमवार को नै अंगूठी को गंगाजल गाए का दूध से स्नान करा कर शक्कर तुलसी के पत्रे व् सफेद फूल में रख दे
व् स्नान आदि कर के पूजा कर के धारण करें .

२ कचा  सूत केसर के रंग से रंग कर व्यापार स्थल पर रख दें .

३ श्यामा तुलसी के आस पास अपने आप पैदा होने वाली खरपतवार को निकल कर स्तन पे पीले वस्त्र में बाँध कर गुरुवार को अपने व्यापर स्थल पर स्थापित करें .

४ अपने घर के द्वार के पास हल्दी से एक स्वस्तिक स्थापित करें और उस पर गुड और चने की दाल
 रखें  कुछ हीओ दिन में तबदीली दिखाई देगी .

५ बारह अभिमंत्रित गोमती चाकर ऑफिस की चोखट पर बाँध देने से भी ग्राहक आकर्षित होते हैं
६  कार्य पर जाते समय इतर लगा कर जाएं

7. होली के पर्व पर एक नए लाल कपडे में लाल गुलाल को बांधकर ( पोटली बना कर ) किसी तश्तरी में अपनी दुकान या घर की तिजोरी में स्थापित करने पर व्यक्ति को जीवन में अपने कार्यों में लगातार लाभ की प्राप्ति होती है , धन का आना लगातार बना रहता है ।

8. प्रत्येक शुक्रवार को लक्ष्मी नारायण मंदिर में गुड चना बाँटने और माँ लक्ष्मी की मूर्ति पर सुंगधित धूप अगरबत्ती को जलाने और उन्हें चडाने से व्यक्ति को जीवन भर अपने कार्य क्षेत्र में लाभ की प्राप्ति होती रहती है ।

9. जब भी आप अपने कार्य क्षेत्र में जाये तो अपने इष्ट देव को ध्यान करके सुगन्धित इत्र लगाकर ही घर से जाये ।

10. कपूर और रोली जलाकर उसकी राख को पुडिया बनाकर अपने घर या दुकान के धन स्थान में रखें तो निश्चित ही लाभ बना रहेगा ।

11. अपने व्यापार स्थल ,यदि नौकरी करते है तो अपने ऑफिस या आप किसी भी कार्य क्षेत्र से जिससे आप सम्बन्ध रखते है पर जाने पर एवं लौटने पर उसके द्वार की जमीन को दाहिने हाथ से छूकर अपने माथे पर अवश्य लगायें और अपने इष्ट देव का ध्यान करें इससे आपका भाग्य आप पर प्रसन्न है ,अपने कार्य क्षेत्र के प्रति अपने हर्दय में श्रद्धा एवं सम्मान रखने से ईश्वर की सदा आप पर कृपा बनी रहती है आप को हमेशा अपने कार्यों में सफलता एवं मान सम्मान की प्राप्ति होती है .( इसकी चिंता कभी भी न करें की आपके सहयोगी /साथी /कर्मचारी / अधिकारी या अन्य कोई भी आपके इस व्यव्हार के बारे में क्या सोचेगा या आपका उपहास होगा । )

12. यदि आपको अपने व्यापार ,नौकरी ,कार्य क्षेत्र में लगातार धन हानि होने लगे , आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हो लोग आपसे रुष्ट होते है तो आप अपने कार्यस्थल या अपने निवास स्थान में झाड़ू को किसी ऐसे स्थान में रखे की किसी भी बाहर वाले की सीधी निगाह उस पर न पड़े , बहुत ही जल्दी आपकी मुश्किलें कम होने लगेगीं ।

13. जिस घर में प्रेम का वातावरण रहता है , जहाँ पर कलह नहीं होती है उस घर में धन धान्य की कभी भी कमी नहीं हो सकती है ।

 

Monday, 9 March 2015

जानिए 2015 में कैसा रहेगा आपका भविष्य

By Unknown   Posted at  23:34   No comments

  जानिए 2015 में कैसा रहेगा आपका भविष्य

कुम्भ राशि

 

 

 

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 शुभ रत्न:-नीलम    शुभ रुद्राक्ष:  सात मुखी रुद्राक्षशुभ रंग - बैंगनी

शुभ अंक- 7
कुम्भ राशि के जातको के लिए वर्ष 2015 मिलाजुला फल देगा. इस वर्ष आप की सृजनात्मक सोच आपको उचित स्थान दिलाएगी, लोगो को जो मदद आपने पूर्व में की है उस का फल इस वर्ष आपको मिलेगा, आपके ज्ञान और कौशल में इस वर्ष अभूतपूर्व वृद्धि होगी. कुम्भ राशि के जातकों के लिए केतु, राहु तथा गुरु की स्थिति के कारण लगभग पूरे वर्ष अचानक घटना ,धन हानि, स्वास्थ्य समबन्धी समस्या तथा शत्रुओं से परेशानी का योग बना रहेगा. अतः विषम परिस्थितियों में भी साहस बनाये रखना होगा. अपने स्वास्थ्य का ध्यान पहले से ही रखें. किसी करीबी से धोखा मिल सकता है अतः आँख बंद करके किसी विश्वास ना करें. उत्तेजना और क्रोध में कोई भी निर्णय ना लें. सुदूर यात्रा विदेश का योग बन रहा है . विदेशी कारोबार से जुड़े लोंगो को अच्छा लाभ का योग है. पिता और उच्च अधिकारीयों का सहयोग मिलेगा. कुछ गुप्त शत्रु नुकसान पहुंचा सकते हैं अतः सतर्क रहें.

केरिएर

केरिअर की द्रष्टि से कुम्भ राशी के जातकों का यह वर्ष उत्तम रहेगा, आपकी सृजनात्मकता आपको अन्य साथियों से आगे ले जायेगी, आपके परिश्रम को उचित सम्मान मिलेगा एवं नयी जिम्मेदारी का भार भी आपके कंधो पर डाला जायेगा स्थान परिवर्तन संभव है. व्यापर में कुम्भ राशि के जातको को वर्ष के आरम्भ में बड़े लाभ की संभावना है. कुम्भ राशि के जातक इस वर्ष अपने कामकाज को बढ़ने में सफल होंगे. कार्य से सम्बंधित यात्राओ का लाभ मिलेगा. विध्यार्थीयो को कड़ी महनत के बाद ही सफलता मिलेगी.

संबंध

कुम्भ राशि के जातको के संबंध इस वर्ष उतार चढ़ाव से भरपूर रहेंगे, कार्य स्थल में लोग आपको समझने में कठिनाई महसूस करेंगे, वरिष्ठो से संबंध मधुर होंगे परन्तु सहकर्मीयो से मनमुटाव व टकराहट हो सकती है, शत्रु पक्ष हावी भी हो सकता है, अपनी वाणी पर संयम बनाये रखना होगा एवं बिना बात के किसी से भी उलझना भरी पड़ सकता है. परिवार में भी वाणी के कारण सदस्य आप के विरूद्ध हो सकते है. जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा परन्तु परिस्थितिवश जीवन साथी से भी वैचारिक मतभेद हो सकता है. अच्छा होगा यदि आप शांत और सहज रहें.

आर्थिक स्थिति

कुम्भ राशि के जातको की आर्थिक स्थिति इस वर्ष सामान्य रहेगी, धन की आवक बनी रहेगी वहीँ खर्च भी बढ़ सकते है, वर्ष के मध्य में कुछ अनापेक्षित खर्च सामने आ सकते है इस लिए धन का प्रबंधन कर के चलना होगा. वर्ष के प्रारंभ में कुछ बड़ी हानी या घाटे की संभावना भी प्रबल हो रही है इस लिए सोच समझ कर ही पैसे का निवेश करे. मनोरंजन एवं खानपान पर खर्च अधिक हो सकता है.

स्वास्थ

कुम्भ राशि के जातको को इस वर्ष मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ का विशेष ख्याल रखना होगा. इस वर्ष मानसिक अवसाद के शिकार भी हो सकते है अतः ज्यादा परिश्रम के बाद कुछ समय स्वयं के लिए भी निकाले गें तो उचित होगा. यदि मधुमेह, थॉयरॉइड या ओबेसिटी जैसी समस्या हो तो विशेष ध्यान रखें नियमित जीवनचर्या एवं संयमित खानपान का ध्यान रखना होगा. इलेक्ट्रिक उपकरणों एवं आंग से दूर रहे ,दुर्घटना की संभावना है.

 कुम्भ 2015 राशिफल:उपाय

    पुजारी को कपडे भेंट करें।
    चांदी का एक चौकोर टुकड़ा पास रखें।

आशा करते हैं कि कुम्भ 2015 राशिफल आपको इस वर्ष सही मार्गदर्शन देने में सहायता करेगा और वर्ष 2015 के भविष्य में होने वाली घटनाओं से आपको अवगत कराएगा।

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Wednesday, 4 March 2015

गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया

By Unknown   Posted at  01:19   No comments
       गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया





गणपति बाप्पा मोरया, मंगल मूर्ती मोरया

देवा हो देवा गणपति देवा तुमसे बढ़कर कौन
स्वामी तुमसे बढ़कर कौन
और तुम्हारे भक्तजनों में हमसे बढ़कर कौन
हमसे बढ़कर कौन


अद्भुत रूप ये काय भारी महिमा बड़ी है दर्शन की
प्रभु महिमा बड़ी है दर्शन की
बिन मांगे पूरी हो जाए जो भी इच्छा हो मन की
प्रभु जो भी इच्छा हो मन की

भक्तों की इस भीड़ में ऐसे बगुला भगत भी मिलते हैं
हाँ बगुला भगत भी मिलते हैं
भेस बदल कर के भक्तों का जो भगवान को छलते हैं
अरे जो भगवान को छलते हैं

छोटी सी आशा लाया हूँ छोटे से मन में दाता
इस छोटे से मन में दाता
माँगने सब आते हैं पहले सच्चा भक्त ही है पाता
सच्चा भक्त ही है पाता

एक डाल के फूलों का भी अलग अलग है भाग्य रहा
प्रभु अलग अलग है भाग्य रहा
दिल में रखना दर उसका मत भूल विधाता जाग रहा
मत भूल विधाता जाग रहा

जय गणेश जय गणेश



Deva Ho Deva Ganpati Deva Song Lyrics in Hindi

By Unknown   Posted at  01:18   No comments
Deva Ho Deva Ganpati Deva Song Lyrics in English






Lyrics of Deva ho Deva in English

ganapati bappa morayaa, mangal moorti moraya

deva ho deva ganapati deva tumase badhakar kaun
swaami tumse badhakar kaun
aur tumhaare bhaktajanon mein hamse badhakar kaun
hamse badhakar kaun

adbhut roop ye kaaya bhaari mahima badi hai darshan ki
prabhu mahima badi hai darshan ki
bin maange poori ho jaaye jo bhi ichchha ho man ki
prabhu jo bhi ichchha ho man ki

bhakton ki is bheed mein aise bagula bhagat bhi milate hain
haan bagula bhagat bhi milate hain
bhes badal kar ke bhakton ka jo bhagawaan ko chhalte hain
are jo bhagawaan ko chhalte hain

chhoti si aasha laaya hoon chhote se man mein daata
is chhote se man mein daata
maangane sab aate hain pahale sachcha bhakt hi hai paata
sachcha bhakt hi hai paata

ek daal ke phoolon ka bhi alag alag hai bhaagy raha
prabhu alag alag hai bhaagy raha
dil mein rakhana dar usaka mat bhool vidhaata jaag raha
mat bhool vidhaata jaag raha
jai ganesh jai ganesh








Sukhkarta Dukhharta Ganesh Aarti

By Unknown   Posted at  01:16   No comments

    Sukhkarta Dukhharta Ganesh Aarti

 

 

 

Sukhkarta Dukhharta Varta Vighnachi
Nurvi Purvi Prem Krupa Jayachi
Sarvangi Sundara Ati Shendurachi
Kanthi Zalakemaal Mukta Phalaachi

Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti
Darshan Maatre Mann Kaamna Purti
Jaidev Jaidev

Ratna Ghachita Phara Tujh Gauri kumra
Chandanachi Uti Kumkum keshara
Hire Jadita Mukuta Shobhato Bhara
Runzun ti Nupure Charni Ghagariya

Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti
Darshan Maatre Mann Kaamna Purti...

Lambodar Pitaambar Parivar Vandana
Saral Sonda Vakratunda Tri Nayana
Das Ramacha Vat Pahe Sadna
Sankati Pavave Nirvani Rakshave Survar Vandana
Jaidev Jaidev
Jaidev Jaidev Jai Mangal Murti
Darshan Maatre Mann Kaamna Purti...

 

 

हिंदी में अर्थ गणेश चालीसा

By Unknown   Posted at  01:12   No comments
                          हिंदी में अर्थ गणेश चालीसा






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  • हिंदी में अर्थ गणेश चालीसा
  • अंग्रेजी में अर्थ गणेश चालीसा
  • जय हो, महिमा, आप करने के लिए सभी महिमा, हे गणेश; आप पूरी दुनिया के भुगतान करता है
  • श्रद्धांजलि, आप गौरी की खुशी और आकर्षक बेटे के लिए कर रहे हैं
  • शिव। आप इस तरह की खुशी के रूप में contraries के सभी जोड़े (के विनाश करनेवाला हैं
  • और दु: ख, जन्म और मृत्यु, आकर्षण और प्रतिकर्षण, आदि।) और
  • उनके पास से उद्धार।
  • आप की जय, हे शंभू के बेटे और गौरी की खुशी, आप कर रहे हैं
  • के चक्र से सभी बाधाओं का नाश और सभी के उद्धारकर्ता
  • जन्म और मृत्यु। आप की जय, शिव के गुर्गे के हे नेता, Bestower
  • के अपने सभी समर्थकों पर खुशी, सभी के शिक्षक, और ऑपरेटर की
  • बुद्धि!
  • गणेश (Vakratunda) हे, चमकीला आप पर है जो केवल Tusk है
  • अपने हाथी चेहरा और अच्छी तरह से सजी अपने पवित्र ट्रंक है; crescent-
  • अपने माथे पर आकार ट्रिपल मार्क चंद्रमा के रूप में के रूप में सुंदर है, और
  • अपनी सुंदरता निहारना जो celestials, पुरुषों और संन्यासियों बंद नहीं कर सकते
  • अपने जादू।
  • अपनी छाती पर तुम्हारी आँखों की खूबसूरती में, जवाहरात की माला है
  •  
  •  
  •  
  •  
  • पूर्ण विकसित कमल और जवाहरात के अपने सिर पर मुकुट। तुम उद्धार अपने
  • चिंता से भक्तों और एक पवित्र कुल्हाड़ी और एक खूबसूरत त्रिशूल फिराना
  • आपके हाथों में। व्यंजनों और सुगंधित फूल के बीच मिठाई laddus
  • फूलों के बीच अपने पसंदीदा रहे हैं।
  • धन्य हैं आप, OKaartikeya के भाई और शिव के प्रिय पुत्र और
  • गौरी; सुंदर ढंग से एक सुंदर पीले रेशमी पोशाक में सज और
  • सभी अपने पैरों पर रत्नों से जड़ित लकड़ी के सैंडल की एक जोड़ी पहने हुए,
  • आप दुनिया के सभी के आशीर्वाद के स्रोत हैं।
  • दोनों समृद्धि और उपलब्धि लहर शाही whisks (chowries) से अधिक
  • आप (वे chowrie-burdars थे) और अपने वाहन, माउस,
  • आपके दरवाजे पर अपनी भव्यता के लिए कहते हैं। अपने जीवन की कहानी तो है जैसा
  • अजीब और अपनी भव्यता का वर्णन करने के लिए उद्यम कर सकते हैं, जो रहस्यमय,
  • सब जो कह रही गुजरता?
  • शिव के रूप में प्रच्छन्न एक दानव, अक्सर क्रम में गौरी भुलाना के लिए वहाँ आया
  • अपने डिजाइन को विफल करने के लिए, गौरी, शिव की प्रिय पत्नी बनाया गया एक
  • उसके शरीर के झाग से दिव्य रूप में।
  • नजर रखने के लिए उसके बेटे पूछ रही है, वह महल-द्वार पर उसे तैनात
  • एक द्वारपाल की तरह। शिव स्वयं वहाँ आया था, वह किया जा रहा है
  • अपरिचित घर में प्रवेश से इनकार किया था।
  • शिव से पूछा: मुझे बताओ, जो अपने पिता को एक आवाज में शहद के रूप में मिठाई,?
  • आप ने कहा, सुनना, महोदय, मैं गौरी का बेटा हूँ; आप पहले की हिम्मत नहीं है
  • इस बिंदु से परे भी एक कदम है।
  • "हे सर! मैं तुम्हें जाने के लिए अनुमति देने से पहले मुझे मेरी माँ की अनुमति लेते हैं
  • अंदर; मेरे जैसे एक मात्र किशोर के साथ तकरार कोई लाभ नहीं की होगी। "
  • आपके कहने के लिए नहीं सुन रहा, Shivaat की ओर भागते हैं करने के लिए परीक्षा
  • ताकि आप उग्र एपिलेशन कि आप झगड़े का घर, जो है, मैदान में फेंक दिया
  • नीचे।
  • क्रोध का एक फिट में, शिव अपने त्रिशूल उठाया और भ्रम के द्वारा संचालित
  • यह आप पर फेंका। आपका सिर, Shirisa फूल की तरह निविदा था
  • कटे और तुरन्त यह आकाश में बढ़ गई है और वहां से गायब हो गया।
  • शिव गौरी, पर्वत की बेटी जहां अंदर खुशी से चला गया
  • राजा, सती आप कैसे दे दिया मुझे बताओ, वह मुस्करा कर पूछा, बैठा हुआ था
  • बेटे को जन्म?
  • पूरे प्रकरण की सुनवाई पर, रहस्य को मंजूरी दे दी। गौरी, हालांकि
  • (गतिहीनता के लिए मनाया जाता है) महान पर्वत राजा की बेटी इतना था
  • वह जमीन पर गिर गया और तुम ने कहा, "उस चले गए और व्याकुल
  • मुझे एक महान अरुचि, मेरे प्रभु किया; अब जाओ और कटे सिर लाने
  • से मेरे बेटे की आप इसे खोजने के लिए जहाँ भी! "
  • शिव, सभी कौशल में विशेषज्ञ, उसके जाने विष्णु के साथ ले लिया
  • लेकिन सिर खोजने में असफल रहा है, वे एक हाथी का एक लाया
  • और ट्रंक पर रखा और उसमें जीवन सांस ली।
  • यह आप श्री गणेश का नाम दिया है जो भगवान शिव था और साथ आप धन्य
  • ज्ञान, बुद्धि और अमरता। आप के बीच पहला हे प्रभु, कर रहे हैं
  • पूजा की जाती है जो लोग; आप सब को नष्ट, वफादार के लिए खुशी लाने
  • अवरोधों बुद्धि के आपरेशन के कारण और।
  • जो कोई किसी मिशन पर तैयार कर पहले आप याद करते हैं पाता है उसके सभी
  • अपने नाम के world.The बहुत याद में निपुण कार्यों
  • अपने सभी क्षमा अनुग्रह के बिना सब खुशी कोई नहीं है लाता है
  • सुरक्षा और अच्छी तरह से दुनिया में कहीं भी किया जा रहा है।
  • आप ने शाप दिया, चाँद के चेहरे काले प्रतिबिंब के साथ धूमिल हो गया था
  • पृथ्वी का यह उज्ज्वल छमाही में चौथे दिन पर प्रकट होता है के रूप में
  • कोई नहीं में देखने की हिम्मत करेगा जो Bhaadrapada (Bhaado),। जब शिव
  • आप (आपके पराक्रम और बुद्धि) परीक्षण करना चाहता था वह करने के लिए कहा
  • पृथ्वी circumnavigate।
  • Sadmukha (अपने भाई Kaartikeya) अपने मोर पर उड़ गया था, वहीं
  • आप budging के बिना) एक आसान पाठ्यक्रम को अपनाया है, आप का नाम लिखा
  • जमीन पर Raama की और सभी गलतफहमी को छोड़, circumnavigated
  • यह।
  • (अत्यंत भक्ति के साथ) आप अपने माता-पिता के पैर लगा हुआ है और
  • उन्हें सात बार circumnavigated। इस प्रकार आप के साथ पुरस्कृत किया गया
  • का फल पृथ्वी, देवताओं किया है कि एक उपलब्धि circumnavigated होने
  • आप पर फूल बरसाना।
  • ऋषि दुर्वासा, Sundardaasa, एक के आश्रम में रहने वाली एक ओर जहां
  • Raama के भक्त, चालीस छंद में गणेश को इस भजन की रचना की बस
  • शिव पुराण में adepts के बीच में अग्रणी के रूप में किया था।
  • हर दिन गणेश की महिमा भजन जो बुद्धिमान साथ ही धन्य हैं
  • परम आनंद। अपने समर्थकों को आशीर्वाद देता है जो Shiva'shenchmen के भगवान
  • धन के साथ, संतान और खुशी भी उन्हें हर पर bestows
  • शुभ वस्तु।
  • DOHAA (अंग्रेजी में अर्थ)
  • ईमानदारी के साथ इस भजन को दोहराता है, जो उन्होंने सभी फैलीसिटी के साथ ही धन्य है
  • और अनुग्रह उपहार, जिनमें से नवीनता के रूप में अच्छी तरह से, कभी अधिक बढ़ता है
  • के रूप में महान सम्मान। के महीने के अंधेरे आधे के तीसरे दिन
  • विक्रम वर्ष में Bhaadra +२,०१० (AD1953) इस
  • चालीस छंद में भजन पूरा किया गया। इस प्रकार Sundaradaasademonstrated गया है
  • भगवान गणेश को अपने बेहिचक भक्ति।

Ganesh Chalisa meaning in English

By Unknown   Posted at  01:09   No comments
        Ganesh Chalisa meaning in English








Glory, glory, all glory to you, O Ganesha; to you the whole world payshomage, for you are the delight of Gauri and the charming son ofShiva. You are the extirpator of all pairs of contraries (such as joyand sorrow, birth and death, attraction and repulsion,etc.) anddeliver from them.

Glory to you, O son of Shambhu and delight of Gauri, you are the
destroyer of all obstacles and deliverer of all from the cycle of
birth and death. Glory to you, O leader of Shiva's henchmen, bestower
of happiness on all your votaries, teacher of all,and operator of the
intellect!

O Ganesha (Vakratunda),resplendent is the only tusk which you have on
your elephant face and well-adorned is your sacred trunk; the crescent-
shaped triple mark on your forehead is as beautiful as the moon, and
the celestials, men and ascetics who behold your loveliness cannot off
its spell.

On your bosom is a garland of jewels, in your eyes the beauty of the
full-blown lotus and on your head a crown of gems. You deliver your
devotees from anxiety and wield a sacred axe and a beautiful trident
in your hands. Sweet laddus among delicacies and fragrant blossoms
among flowers are your favourites.


Blessed are you, OKaartikeya's brother and beloved son of Shiva and
Gauri; elegantly attired in a beautiful yellow silken dress and
wearing a pair of wooden sandals all studded with gems on your feet,
you are the source of all the blessings of the world.

Both prosperity and accomplishment wave royal whisks (chowries) over
you (as if they were chowrie-burdars) and your vehicle, the mouse,
adds to your splendour at your door. As the story of your life is so
strange and mysterious, who can venture to describe your magnificence,
which passes all telling?

A demon, disguised as Shiva,often came there to delude Gauri in order
to foil his design, Gauri, the beloved consort of Shiva created a
divine form from the scurf of her body.


Asking her son to keep watch, she stationed him at the palace-door
like a doorkeeper. When Shiva himself came there, he, being
unrecognised was denied entrance into the house.

Shiva asked: Tell me, who is your father?In a voice sweet as honey,
you replied, Hearken, sir, I am Gauri's son; don't you dare advance
even a step beyond this point.

" O Sir! Let me take my mother's permission before I allow you to go
inside; wrangling with a mere stripling like me will be of no avail."
Not listening to your behest, Shivaat tempted to rush towards the
house, which so vexed you that you, waxing furious, threw the gauntlet
down.


In a fit of rage, Shiva picked up his trident and driven by delusion
hurled it on you. Your head, tender like the Shirisa flower was
severed and instantly it soared into the sky and disappeared there.

When Shiva went happily inside where Gauri, daughter of the Mountain
king was sitting, he smilingly asked, Tell me, Sati how did you give
birth to son?

On hearing the whole episode, the mystery cleared. Gauri, though
daughter of the great mountain King(celebrated for immobility) was so
moved and distraught that she fell to the ground and said, " You have
done me a great disfavour, my Lord; Now go and fetch the severed head
of my son from wherever you find it!"

Shiva, expert in all skills,took his departure accompanied by Vishnu,
but having failed to find the head,they brought one of an elephant
and placed it upon the trunk and breathed life into it.

It was Lord Shiva who named you Shri Ganesha and blessed you with
knowledge, wisdom and immortality. You are O Lord, the first among
those who are worshiped; you bring joy to the faithful,destroy all
obstructions and cause the operation of the intellect.

Whosoever remembers you before embarking on any mission finds all his
tasks accomplished in the world.The very remembrance of your name
brings all happiness without your all-pardoning grace there is no
security and well being anywhere in the world.

Cursed by you, the moon's face was tarnished with the black reflection
of the earth as it appears on the fourth day in the bright half of
Bhaadrapada (Bhaado), which none would dare to look at. When Shiva
wanted to test you (your might and intelligence) he asked you to
circumnavigate the earth.


While Sadmukha (your brother Kaartikeya) went flying on his peacock,
you adopted an easier course) without budging, you scribbled the name
of Raama on the ground and abandoning all misgivings, circumnavigated
it.


( With utmost devotion) you clasped the feet of your parents and
circumnavigated them seven times. Thus were you rewarded with the
fruit of having circumnavigated the earth, a feat that made the gods
rain down flowers on you.

While dwelling in the hermitage of the sage Durvasa, Sundardaasa, a
devotee of Raama, composed this hymn to Ganesha in forty verses just
as the foremost among the adepts in the Shiva Purana had done.

The wise who hymn the glory of Ganesha every day are blessed with
supreme bliss. The lord of Shiva'shenchmen who blesses his votaries
with wealth, progeny and happiness also bestows upon them every
auspicious object.

DOHAA (meaning in English)


He who repeats this hymn with earnestness is blessed with all felicity
and gracious gifts, the novelty of which grows ever greater, as well
as great honour. On the third day of the dark half of the month of
Bhaadra in the Vikrama year two thousand and ten (A. D.1953) this
hymn in forty verses was completed. Thus has Sundaradaasademonstrated
his unflinching devotion to Lord Ganesha.

Ganesh Chalisa in English

By Unknown   Posted at  01:07   No comments

               Ganesh Chalisa in English

 

 

 


Jai Ganapati Sadguna Sadan,
Kavivar Badan Kripaal,
Vighna Haran Mangal Karan,
Jai Jai Girijaalaal

Jai Jai Jai Ganapati Ganaraaju,
Mangal Bharana Karana Shubha Kaajuu,
Jai Gajbadan Sadan Sukhdaata,
Vishva Vinaayaka Buddhi Vidhaataa

VakraTunda Shuchi Shunda Suhaavana,
Tilaka Tripunda bhaal Man Bhaavan,
Raajata Mani Muktana ura maala,
Swarna Mukuta Shira Nayana Vishaalaa

Pustak Paani Kuthaar Trishuulam,
Modaka Bhoga Sugandhit Phuulam,
Sundara Piitaambar Tana Saajit,
Charana Paadukaa Muni Man Raajit

Dhani Shiva Suvan Shadaanana Bhraataa,
Gaurii Lalan Vishva-Vikhyaata,
Riddhi Siddhi Tav Chanvar Sudhaare,
Mooshaka Vaahan Sohat Dvaare

Kahaun Janma Shubh Kathaa Tumhari,
Ati Shuchi Paavan Mangalkaarii,
Ek Samay Giriraaj Kumaarii,
Putra Hetu Tapa Kiinhaa Bhaarii

Bhayo Yagya Jaba Poorana Anupaa,
Taba Pahunchyo Tuma Dhari Dvija Rupaa,
Atithi Jaani Kay Gaurii Sukhaarii,
Bahu Vidhi Sevaa Karii Tumhaarii

Ati Prasanna Hvai Tum Vara Diinhaa,
Maatu Putra Hit Jo Tap Kiinhaa,
Milhii Putra Tuhi, Buddhi Vishaala,
Binaa Garbha Dhaarana Yahi Kaalaa

Gananaayaka Guna Gyaan Nidhaanaa,
Puujita Pratham Roop Bhagavaanaa,
Asa Kehi Antardhyaana Roop Hvai,
Palanaa Par Baalak Svaroop Hvai

BaniShishuRudanJabahiTum Thaanaa,
Lakhi Mukh Sukh Nahin Gauri Samaanaa,
Sakal Magan Sukha Mangal Gaavahin,
Nabha Te Suran Suman Varshaavahin

Shambhu Umaa Bahudaan Lutaavahin,
Sura Munijana Suta Dekhan Aavahin,
Lakhi Ati Aanand Mangal Saajaa,
Dekhan Bhii Aaye Shani Raajaa

Nija Avaguna Gani Shani Man Maahiin,
Baalak Dekhan Chaahat Naahiin,
Girijaa Kachhu Man Bheda Badhaayo,
Utsava Mora Na Shani Tuhi Bhaayo

Kahana Lage Shani Man Sakuchaai,
Kaa Karihau Shishu Mohi Dikhayii,
Nahin Vishvaasa Umaa Ura Bhayauu,
Shani Son Baalak Dekhan Kahyau

Padatahin Shani Drigakona Prakaashaa,
Baalak Sira Udi Gayo Aakaashaa,
Girajaa Girii Vikala Hvai Dharanii,
So Dukha Dashaa Gayo Nahin Varanii

Haahaakaara Machyo Kailaashaa,
Shani Kiinhon Lakhi Suta Ko Naashaa,
Turat Garuda Chadhi Vishnu Sidhaaye,
Kaati Chakra So GajaShira Laaye

Baalak Ke Dhada Uupar Dhaarayo,
Praana Mantra Padhi Shankar Daarayo,
Naama’Ganesha’ShambhuTabaKiinhe,
Pratham Poojya Buddhi Nidhi Vara Diinhe

Buddhi Pariikshaa Jab Shiva Kiinhaa,
Prithvii Kar Pradakshinaa Liinhaa,
Chale Shadaanana Bharami Bhulaai,
Rache Baithii Tum Buddhi Upaai

Charana Maatu-Pitu Ke Dhara Liinhen,
Tinake Saat Pradakshina Kiinhen
Dhani Ganesha Kahi Shiva Hiye Harashyo,
Nabha Te Suran Suman Bahu Barse

Tumharii Mahima Buddhi Badaai,
Shesha Sahasa Mukha Sake Na Gaai,
Main Mati Heen Maliina Dukhaarii,
Karahun Kaun Vidhi Vinaya Tumhaarii

Bhajata ‘Raamsundara’ Prabhudaasaa,
Jaga Prayaaga Kakraa Durvaasaa,
Ab Prabhu Dayaa Deena Par Keejai,
Apnii Bhakti Shakti Kuchha Deejai

ll Dohaa ll

Shrii Ganesha Yeh Chaalisaa, Paatha Karre Dhara Dhyaan l
Nita Nav Mangala Graha Base, Lahe Jagat Sanmaana ll
Sambandh Apna Sahasra Dash, Rishi panchamii dinesha l
Poorana Chaalisaa Bhayo, Mangala Moorti Ganesha ll 

 

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